Vitamin D deficiency : शरीर को ठीक से काम करने के लिए कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जिनमें विटामिन D एक बेहद जरूरी तत्व है। यह न सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाता है बल्कि इम्यून सिस्टम, मानसिक स्वास्थ्य और कैल्शियम अवशोषण के लिए भी जरूरी है। इसकी कमी से शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विटामिन D(Vitamin D) क्या है?
विटामिन D एक फैट-सॉल्युबल विटामिन है, जो सूरज की किरणों से शरीर में बनता है। यह दो प्रकार का होता है:
- विटामिन D2 – जो फलों, सब्जियों और पौधों में मिलता है
- विटामिन D3 – जो त्वचा पर सूरज की UVB किरणों से बनता है
यह शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट के स्तर को नियंत्रित करता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने में मदद करता है। साथ ही यह इम्यूनिटी बढ़ाने, मूड को स्थिर रखने और घाव भरने की प्रक्रिया में भी अहम होता है।
विटामिन D की कमी के कारण
- पर्याप्त धूप में न जाना
- आहार में विटामिन D की कमी
- लीवर या किडनी की बीमारियां
- कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट
- मोटापा या अत्यधिक मेलेनिन युक्त त्वचा
- विटामिन D का शरीर में अवशोषण न होना
यह भी पढ़ें : विटामिन B12 की कमी: लक्षण, कारण और बचाव के उपाय
विटामिन D की कमी के लक्षण
- लगातार थकान और सुस्ती
- हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द
- मांसपेशियों में कमजोरी और ऐंठन
- बार-बार इंफेक्शन या बीमार पड़ना
- डिप्रेशन और मूड स्विंग्स
- जोड़ों में दर्द
- नींद न आना या बेचैनी
- घाव देर से भरना
- बालों का झड़ना
विटामिन D की कमी से होने वाली बीमारियां
बीमारी | असर |
रिकेट्स | बच्चों में हड्डियों का विकास रुकना |
ऑस्टियोमलेशिया | बड़ों में हड्डियों का कमजोर होना |
ऑस्टियोपोरोसिस | हड्डियों में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ना |
डिप्रेशन | मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट |
हृदय रोग | दिल से जुड़ी समस्याएं |
डायबिटीज | टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा |
विटामिन D की कमी से बचाव कैसे करें?
- रोजाना सुबह 7 से 10 बजे तक 20–30 मिनट धूप में रहें
- आहार में अंडा, मछली, मशरूम, दूध और दही शामिल करें
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें
- नियमित जांच (जैसे: Vitamin D टेस्ट) कराएं