विश्वदीपक त्रिखा: थिएटर से लोगों का डर किया दूर
हरियाणा के रंगमंच कलाकार विश्वदीपक त्रिखा (71) पिछले 50 वर्षों से थिएटर कर रहे हैं। उन्होंने 1970 में गुरुग्राम में अपने पहले नाटक का मंचन किया था और अब तक 500 से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान, जब दुनिया भय और अवसाद से जूझ रही थी,
तब उन्होंने अपनी ‘सप्तक कल्चरल सोसायटी’ के सहयोग से ‘घर फूंक थिएटर’ शुरू किया। इस पहल के तहत दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बंगाल और राजस्थान से टीमें बुलाकर थिएटर शो आयोजित किए गए, जिससे महामारी के भय को कम करने में मदद मिली। आज भी यह अभियान जारी है और अब तक 100 से अधिक शो किए जा चुके हैं।
हरियाणा कला परिषद के पूर्व निदेशक और अभिनेता त्रिखा एनएसडी के भारत रंग महोत्सव में चयन समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। उनकी प्रमुख प्रस्तुतियों में ‘गधे की बारात’ शामिल है, जिसके 350 से अधिक शो हो चुके हैं।
विश्व रंगमंच दिवस(World Theatre Day) का इतिहास और थीम
हर साल 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस(World Theatre Day) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1961 में अंतरराष्ट्रीय रंगमंच संस्थान (ITI) ने की थी। पहली बार यह दिवस 1962 में फ्रांसीसी नाटककार जीन कोक्ट्यू के संदेश के साथ मनाया गया।
इस वर्ष की थीम है – ‘Theatre and a Culture of Peace’ यानी ‘रंगमंच और शांति की संस्कृति’। यह थीम रंगमंच की उस शक्ति को दर्शाती है, जिससे समाज में संवाद, सह-अस्तित्व और शांति को बढ़ावा मिलता है।
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थिएटर और बॉलीवुड में कलाकारों की बढ़ती मांग
थिएटर से जुड़े कलाकारों को बॉलीवुड और वेब सीरीज में भी काफी तवज्जो मिल रही है। अभिनेता अनिल रस्तोगी के अनुसार, थिएटर सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने और सामाजिक बदलाव लाने का एक माध्यम भी है। उत्तर प्रदेश के कई कलाकार बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुके हैं।
उत्तर प्रदेश से बॉलीवुड तक पहुंचे प्रमुख थिएटर कलाकार:
- अमिताभ बच्चन (प्रयागराज) – भारतीय सिनेमा के महानायक
- नसीरुद्दीन शाह (बाराबंकी) – समानांतर सिनेमा के पथप्रदर्शक
- नवाजुद्दीन सिद्दीकी (मुजफ्फरनगर) – थिएटर से बॉलीवुड तक का सफर
- राजपाल यादव (शाहजहांपुर) – कॉमेडी के बादशाह
- प्रियंका चोपड़ा (लखनऊ-बरेली) – बॉलीवुड से हॉलीवुड तक का सफर
- अनुष्का शर्मा (अयोध्या) – मॉडलिंग से फिल्म इंडस्ट्री में कदम
- लारा दत्ता (गाजियाबाद) – मिस यूनिवर्स से फिल्मी दुनिया तक
थिएटर से जुड़ी चुनौतियां और संभावनाएं
थिएटर कलाकारों को ऑडिटोरियम की कमी, आर्थिक सहायता का अभाव और प्रशासनिक अड़चनें झेलनी पड़ती हैं। भारतेंदु नाटक कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी ने बताया कि थिएटर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सरकार मंथन कर रही है।
बच्चों में थिएटर की बढ़ती रुचि थिएटर कलाकार अपूर्वा शाह का मानना है कि डिजिटल युग के बावजूद थिएटर की प्रासंगिकता बनी हुई है। स्कूलों में बच्चों को थिएटर से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे उनकी संवाद क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ रहा है।