Wakf Amendment Bill 2024 : केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को बुधवार को लोकसभा में बहुमत से पारित कर दिया गया। 288 बनाम 232 के मतों से पास हुए इस विधेयक पर पूरे दिन तीखी बहस हुई, जिसमें विपक्ष ने इसे मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बताया।
अब यह विधेयक आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।
क्या है Wakf Amendment Bill 2024?
यह विधेयक वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम और महिलाओं की भागीदारी, वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण में पारदर्शिता और वक्फ ट्रिब्यूनल के निर्णयों को हाईकोर्ट में चुनौती देने का प्रावधान है।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लाया गया है, जबकि विपक्ष का तर्क है कि यह मुस्लिम समाज की धार्मिक स्वतंत्रता में दखल है।
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विधेयक के प्रमुख बदलाव
- वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम और महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य किया जाएगा।
- जिलाधीश (कलेक्टर) को वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण करने का अधिकार दिया जाएगा।
- वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती देने की अनुमति होगी।
- वक्फ अधिनियम की धारा 40 हटाई जाएगी, जिससे वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने का अधिकार खो देगा।
- राज्य सरकारें वक्फ संपत्तियों का ऑडिट करने में सक्षम होंगी।
- वक्फ न्यायाधिकरण में अब अपर जिला मजिस्ट्रेट शामिल होंगे, मुस्लिम कानून विशेषज्ञ की अनिवार्यता समाप्त होगी।
- शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए जाएंगे।
विपक्ष क्यों कर रहा विरोध?
- धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप: कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), डीएमके और AIMIM सहित विपक्षी दलों का कहना है कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है।
- संविधान का उल्लंघन: AIMPLB (ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड) का दावा है कि यह विधेयक अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन करता है।
- सरकारी दखल बढ़ाने का आरोप: विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण पाना चाहती है।
संसद में समीकरण:
सदन | एनडीए सांसद | विपक्षी सांसद | बहुमत की स्थिति |
लोकसभा | 293 | 233 | पारित हो गया |
राज्यसभा | 115 | बहुमत संदेहास्पद | टकराव संभव |
आगे क्या?
यदि राज्यसभा में यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा। लेकिन अगर राज्यसभा में विपक्ष विधेयक को रोकने में सफल रहता है, तो इसे संयुक्त संसदीय समिति में भेजा जा सकता है।