शहीद दिवस 2025: अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शौर्यगाथा

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Martyr's Day

Martyr’s Day 2025 : 23 मार्च का दिन भारतीय इतिहास में वीरता और बलिदान का प्रतीक है। इस दिन को शहीद दिवस (Martyr’s Day) के रूप में मनाया जाता है, जब देश के तीन वीर सपूत—भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु—ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया और स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति दे दी।

इन क्रांतिकारियों का साहस और त्याग आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की भावना को जाग्रत करता है।

शहीद दिवस (Martyr’s Day) का इतिहास

लाला लाजपत राय की मृत्यु और विद्रोह की चिंगारी: साल 1928 में जब ब्रिटिश सरकार ने साइमन कमीशन भेजा, तो इसमें भारतीय प्रतिनिधित्व की कमी के कारण देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

लाला लाजपत राय ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया, लेकिन विरोध के दौरान ब्रिटिश पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे लाला जी की गंभीर चोटों के कारण मृत्यु हो गई। इस घटना ने भगत सिंह और उनके साथियों को गहराई से झकझोर दिया, और उन्होंने लाला जी की मौत का बदला लेने का संकल्प लिया।

सॉन्डर्स की हत्या: भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने लाहौर में ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स को मारकर अपने विद्रोह की पहली चिंगारी भड़का दी। इस घटना ने ब्रिटिश हुकूमत को हिला कर रख दिया और इन क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास शुरू हुए।

केंद्रीय असेंबली में बम फेंकना: 1929 में भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश संसद में बम फेंका और “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाए। इस बम धमाके का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि ब्रिटिश सरकार को भारतीय स्वतंत्रता की मांग सुनने पर मजबूर करना था। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी स्वेच्छा से दी और जेल में भी अपने क्रांतिकारी विचारों का प्रसार जारी रखा।

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फांसी से पहले की अंतिम घड़ियां

23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई। फांसी का समय सुबह का होता था, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इन्हें शाम 7:30 बजे ही गुपचुप फांसी पर लटका दिया। तीनों वीरों ने इस अंतिम क्षण का सामना साहस और मुस्कान के साथ किया।

फांसी से पहले का प्रसंग: भगत सिंह को किताबें पढ़ने का बेहद शौक था। फांसी से पहले भी वह लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे। जब उनसे उनकी अंतिम इच्छा पूछी गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें किताब पूरी करने का समय दिया जाए। यह उनकी बौद्धिक गहराई और दृढ़ निश्चय का परिचायक था।

फंदे को चूमा: जब उन्हें फांसी घर ले जाया जा रहा था, तो भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु हंसते हुए और देशभक्ति के गीत गाते हुए जा रहे थे। भगत सिंह ने फांसी के फंदे को चूमा और बिना किसी डर के मौत को गले लगा लिया।

शहीद दिवस(Martyr’s Day) का महत्व

शहीद दिवस केवल भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह उन सभी क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि आजादी की कीमत कितनी अधिक थी और इसे बनाए रखने के लिए हमें हमेशा सतर्क और देशभक्त बने रहना चाहिए।

शहीद दिवस पर प्रेरणादायक संदेश

इस खास मौके पर अपने दोस्तों और परिवार के साथ ये देशभक्ति से भरे संदेश जरूर शेयर करें:

  • “आओ झुककर सलाम करें उन शहीदों को, जिनकी हिम्मत से यह वतन आबाद है।”
  • “जो शहीद हुए हैं उनका अरमान जिंदा है, जब तक रहेगा भारत उनका नाम जिंदा है।”
  • “वो फांसी पर झूल गए ताकि हम सिर उठाकर जी सकें, उनका बलिदान व्यर्थ न जाने दें।”

शहीद दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने देश की रक्षा और उसकी समृद्धि के लिए हमेशा तत्पर रहें। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत ने हमें जो आजादी दिलाई, उसे हम कभी नहीं भूल सकते।

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Priya Parmar

प्रिया परमार, WordWala.com की लेखिका, तीन साल के अनुभव के साथ टेक, हेल्थ, स्पोर्ट्स, सरकारी योजनाएं, करियर और ब्रेकिंग न्यूज़ की जानकारी देती हैं। प्रिया की कोशिश रहती है कि पाठकों को हर खबर सटीक और आसान भाषा में मिले, ताकि वे हर अपडेट से जुड़े रहें।

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